 |
|
 |
|
 |
|
|
 |
|
 |
|
|
|
|
 |
|
 |
|
|
|
Vyapar Bhaskar News |
|
सरकार को अपनी गलत नीतियां बदलने की आवश्यकता
|
|
गेहूं का समर्थन मूल्य भाव क्भ्ख्भ् रुपये प्रति क्विंञ्टल हो
आदिश जैन
हिसार। भारत सरकार दूसरे देशों से चावल आयात करने की बात कर रही है, जबकि भारत देश में ही इस वर्ष पूसा क्क्ख्क्, डीबी व अन्य किस्मों केञ् भाव पिछले वर्ष से काफी नीचे हैं, अगर भारत सरकार केञ् वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा व कृञ्षि मंत्री शरद पवार केञ् विचार आपस मे मिल जाए तो हमें चावल आयात नहीं करना पड़ेगा। किसानों केञ् यहां हरियाणा, पंजाब में चावल का स्टॉक काफी पड़ा हुआ है व राईस मिलों में भी धान व चावल का बहुत अधिक स्टॉक है। कम कीमत केञ् कारण जे अभी बेच नहीं रहे हैं। タया भारत सरकार अपने ही देश केञ् व्यापारियों भाईयों को नुकसान पहुंचाएगी। चावल का दूसरे देशों से आयात करकेञ्। पिछली बार केञ् धान केञ् भाव व चावल केञ् भाव देखते हुए हमारे किसान भाईयों ने दूसरी फसल छोडक़र धान की खेती अधिक की थी। जोकि हरियाणा पंजाब में ही पिछले वर्ष केञ् मुकाबले ख्ख् प्रतिशत अधिक है। फिर भी हमारे मंत्री दूसरे देशों से चावल आयात करने की सोच रहे हैं। タया मंत्रालय दो-तीन व्यापारियो को ही इसका फायदा पहुुुचाना चाहता है। タयोंकि ये व्यापारी हिन्दुस्तान केञ् सबसे बड़े चावल निर्यातक हैं। अगर यही नीति सरकार की रही तो राईस मिलर्स कहा जायेंगे। मैं चाहूंगा कि कृञ्षि मंत्रालय व वाणिज्य मंत्रालय में प्रधानमंत्री जी हस्तक्षेप कर चावल उद्योग केञ् बारे में सोचें व राईस मिलर्स जोकि लघु उद्योग है, इसकेञ् बारे में विचार-विमर्श करना होगा। अन्यथा भारत ख्ख् तक विकसित देश नहीं बन सकेञ्गा। कृञ्षि व लघु उद्योग ही भारत को विकसित देशों की कतार में खड़ा कर सकते हैं। राईस मिलर्स को तो वैसे भी सरकार की गलत नीतियों केञ् कारण अलग व्यापार ढूंढना होगा। タयोंकि आज केञ् समय में राईस मिलस चलाना नुकसान का व्यापार साबित हो रहा है, वह भी सिर्ड्डञ् सरकार केञ् कारण।
ये ही हाल गेहूं का है, गेहूं का भाव अधिक नहीं है, व गेहूं में भी सरकार की नीति ड्डेञ्ल है, सरकार को अपने मापदंड व नीतियों बदलने की आवश्यकता है। गेहूं की नई फसल आने से पहले सरकार को चाहिए कि गेहूं का समर्थन मूल्य हमारी भारत सरकार व राज्य सरकारें कम से कम क्भ्ख्भ् रुपये प्रति क्विंञ्टल करें। タयोंकि दिन प्रति दिन क्कद्गह्यह्लद्बष्ह्यद्बस्त्रद्ग केञ् भाव अधिक हो रहे हैं, बुआई-बिजाई, दवाई खाद का किसान भाईयों का खर्च पहले से तीन गुना अधिक हो गया है। बोनस हमारे कृञ्षि मंत्री जी बाद में घोषित करते हैं। वह बोनस भी पहले आ जाना चाहिए, जिससे इसका फायदा किसान भाईयों को मिले न कि व्यापारियों, व आढतियों को। बोनस बाद में आने से हिन्दुस्तान केञ् फ्फ् प्रतिशत किसान अपनी फसल बेच चुकेञ् होते हैं, इसलिए वह बोनस से वंचित रह जाते हैं। ऐसा タयों? अगर भारत को विकसित राष्ट्र बनाना है तो कृञ्षि, किसानों व लघु उद्योगों व छोटे व्यापारियों को आगे लाना होगा। इसकेञ् साथ-साथ इनकेञ् लिए प्रोत्साहन पैकेञ्ज या स्कीम चलानी होगी। हम दावे से कह सकते हैं कि भारत सरकार छोटे उद्यमियों व किसानों की तरफ विशेष ध्यान दे तो भारत ख्ख् से पहले ही विकसित राष्ट्र बन जायेगा। タयोंकि लघु उद्योग ही बड़े उद्योगों केञ् कलपुर्जे तैयार करते हैं। जैसे मार्केञ्टिंग, रॉ मेटरियल इत्यादि से माल तैयार करना सामान को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाना इत्यादि। इतना सब होने केञ् बावजूद बड़े उद्योग, राज्य सरकारें और केञ्न्द्र सरकार लघु उद्योगों व छोटे व्यापारियों केञ् लिए कुञ्छ マाी नहीं करती।
भारत सरकार केञ् कृञ्षि मंत्री, वाणिज्य मंत्री, योजना आयोग केञ् उपाध्यक्ष व छोटे व्यापारियों और किसानों की साल में कम से कम एक बार बैठक होनी चाहिए। जिससे कि हर व्यापारी व किसान अपनी समस्याओं को सीधे-सीधे सरकार तक पहुंचा सकेञ्, और जो भी नीतियों को बदलने की आवश्यकता है, उसको बदला जा सकेञ्, हरियाणा व पंजाब राज्य दोनों राज्यों गेहूं व चावल की पैदावार में भारत में सबसे अग्रणी हैं, ये ही राज्य लघ उद्योगों में सबसे पीछे हैं, ऐसा タयों? タयोंकि इन राज्यों की आर्थिक नीतियां गलत हैं, यहां की सरकार उद्योगों में पैसा न लगाकर प्रोपर्टी में निवेश कर लेती हैं। ये सिर्ड्डञ् भारत सरकार की गलत नीतियों का ही परिणाम है।
हमारे प्रधानमंत्री महोदय जी को विशषकर हरियाणा, पंजाब केञ् लघु उद्योगों व किसानों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। ताकि दोनपों राज्य लघु उद्योगों में विकसित हो सकेंञ्। जिससे कि वह マाारत को विकसित देशों की कतार में खड़ा होने में अपना पूर्ण सहयोग दे सकेंञ्।
|
|
|
|
|
|
 |
|
Hindi News Title |
|
| | | | | | |