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दलहनों के हालात गत वर्ष से विपरीत


दिल्ली। देश में दलहनों की पैदावार खपत के मुकाबले काफी कम होने के कारण आयात की रफ्तार में प्रति वर्ष अच्छी—खासी वृद्धि आ रही है। जिसका लाभ विदेशी उत्पादक देश भाव बढ़ाकर उठाते आ रहे हैं। पिछले वर्ष देश की बढ़ती खपत और कमजोर उत्पादन को देख विदेशी उत्पादक देशों ने भाव इतने बढ़ाये कि दाल आम आदमी की पहुंच से काफी दूर हो गयी। घरेलू बाजार में कीमत 150/200 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गये। दालों की ऊँची कीमत का असर दलहनों पर भी पड़ा। इनके भाव भी रिकॉर्ड ऊँचाई पर पहुँच गये।
रिकॉर्ड ऊँचाई पर दलहनों के भाव पहुँचने के कारण किसानों का रुझान दलहन बिजाई की ओर शानदार बढ़ा। फसलों को मौसम का साथ भी मिला, इसलिए देश में दलहनों की पैदावार खरीफ और रबी सीजन के दौरान शानदार वृद्धि की ओर दिखाई दे रही है।
खरीफ दलहनों की पैदावार बढ़ने के कारण इनके भाव सरकारी मूल्य से काफी नीचे आ चुके हैं। जिस किसान ने रिकॉर्ड ऊँची कीमत को देख दलहनों की बिजाई की थी वह अब आपको ठगा हुआ महसूस कर रहा है। इसलिए कुछ लोग देश से दाल निर्यात की कोशिश भी करने लगे हैं जिससे उत्पादकों को उचित मूल्य मिल सके।
आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष दलहन की पैदावार 221.4 लाख्.ा टन होने की संभावना है। इसके साथ—साथ आयात की जिस प्रकार रफ्तार बनी हुई है उससे साफ जाहिर है कि देश में उपलब्धता स्टॉक से अधिक होगी।
पिछले वर्ष दलहनों का उत्पादन 165 लाख टन रहा था और आयात 58 लाख टन के लगभग हुआ। इसलिए कुल दलहनों की मौजूदगी देश में 223 लाख टन पर पहुंची। खपत 240/245 लाख टन होने से कीमत में जोरदार उछाल आया। इस वर्ष हालात गत वर्ष से पूरी तरह विपरीत हैं।