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गेहूं आयेगा न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे


दिल्ली। देश में इस वर्ष गेहूं की बिजाई जोरदार बढ़ने और मौसम पूरी तरह मेहरबान रहने से उत्पादन में जोरदार उछाल आने की संभावना है। इसी के कारण पिछले 8/10 दिनों से फ्लोर मिलों की खरीद मंडियों से पूरी तरह गायब है। इस समय आयातित गेहूं नीचे भावों पर उपलब्ध होने के कारण आगामी दिनों कीमत में गिरावट के आसार दिखाई दे रहे हैंं।
मध्यप्रदेश की उत्पादक मंडियों में नये गेहूं की आवक शुरू हो चुकी है। आगामी 8/10 दिनों के दौरान काफी मंडियों में नये गेहूं की मौजूदगी देखी जा सकेगी। पिछले महीनों के दौरान जिस प्रकार कीमत में वृद्धि आ रही थी उसको देख विदेशों से सौदे किये गये। उन्हें सौदों का आगमन होने से कीमत पिछले 8/10 दिनों से गिरावट की ओर बनी हुई है। घरेलू फसल के आगमन को देख आयातक भाव घटाकर बिकवाल हैं। पिछले सप्ताह सरकार ने कृषि जिन्सों के अग्रिम उत्पादन अनुमान जारी किये। जिनमें गेहूं की पैदावार रिकॉर्ड 966.4 लाख टन बताई गई, अभी अधिकांश फसल खेतों में खड़ी है। यदि आगामी दिनों भी फसल को मौसम का साथ मिलता है तो उत्पादन और भी अधिक हो सकता है।
बढ़ते उत्पादन को देख अभी से खरीद के आंकड़े भी राज्यवार घोषित कर दिये गये हैं। इस वष गेहूं की खरीद 330 लाख टन करने की योजना है ताकि खाली पड़े गोदामों को फिर से भरा जा सके। यह अभी योजना है, समय आने पर कितनी हकीकत में बदलेगी यह तो समय ही बतायेगा। इस समय यही कहा जा सकता है कि कीमत में गिरावट ही गिरावट दिखाई दे रही है। यदि सरकार 330 लाख टन की खरीद करती है तो भी उत्पादक क्षेत्रों की मंडियों में गेहूं न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे आने के आसार प्रबल हैं।