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चना आयेगा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर?


इन्दौर। जैसे—जैसे समय बढ़ रहा है वैसे—वैसे ही चना नीचे की ओर आ रहा है। प्रतिदिन गिरती हुई कीमत को देख अब अधिकांश विश्लेषक और कारोबारी गिरावट ही गिरावट का शोर मचा रहे हैं। जिसका संकेत व्यापार भास्कर ने पिछले महीने ही दे दिया था। अब मंदी में सभी को मंदी दिखाई दे रही है।
इस समय मध्य प्रदेश की इन्दौर मंडी में चना के भाव 5200 रुपये प्रति क्विंटल के लगभग आ चुके हैं। महाराष्ट्र, कर्नाटक और राजस्थान की मंडियों में भी कीमत गिर रही है इसलिए खपत वाली मंडियों में लिवाल मैदान छोड़कर भाग रहे हैंं।
अभी नई फसल की आवक शुरू भी नहीं हुई है। जो चना 15000 रुपये के लगभग पहुंच गया था उसको 6000 रुपये प्रति क्विंटल खपत वाली मंडियों में खरीदार नहीं मिल रहे हैं। जिसस समय फसल की आवक का दबाव बनेगा उस समय कीमत कहाँ तक आ सकती है इसका सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है।
व्यापारिक सूत्रों का कहना है कि खरीफ सीजन के दौरान पैदा होने वाली दालों के भाव इस सीजन के दौरान न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे आ गए हैं। इस वर्ष जिस प्रकार चना की बिजाई बढ़ी है और फसल को मौसम का सहयोग मिलने से उत्पादकता में वृद्धि के आसार बन रहे हैं उसको देख चना न्यूनतम समर्थन मूल्य पर आने का रास्ता दिखाई देने लगा है।चना की आवक का दबाव मार्च माह के दौरान अच्छा—खासा उत्पादक क्षेत्रों की मंडियों में देखा जा सकेगा। हालांकि चालू माह के दौरान ही बढ़ती आवक से कीमत में गिरावट का सिलसिला ऐसा शुरू होगा कि उसको रोकने वाला कोई सामने नहीं आयेगा, क्योंकि अन्य दलहनों की गिरावट का असर भी पड़ेगा।